~ चार से छह…

~ डेस्टिनी…

हुआ यूं
उसको बुलाया
निकट बिठाया
चाय पिलाई
और फिर पूछा
ओ ज़िंदगी
क्यूं रहती है
तू
मुझसे रूठी

उसने भी
नज़रे उठाई
मुस्कुराई
और बोली
हट परे
पगले कहीं के
मैं रूठी
रत्ती भर नहीं

इक बात सुन
न मैं खुश न तू खुश
न ही हम है दुःखी
एक ही मकसद
हमारा
मौत इज़ द डेस्टिनी
हैव व्हिस्की
ऑर
टी…